Sunday, January 26, 2025

Arti Har-Har Mahadev Ji Ki || आरती हर-हर महादेव जी की

 

आरती हर-हर महादेव जी की


सत्य, सनातन, सुन्दर शिव, सबके स्वामी।

 

अविकारी, अविनाशी, अज, अंतर्यामी।। हर-हर...

 

आदि, अनंत, अनामय, अकल कलाधारी।

 

अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी।। हर-हर...

 

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, तुम त्रिमूर्तिधारी।

 

कर्ता, भर्ता, धर्ता तुम ही संहारी।। हर-हर...

 

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औघरदानी।

 

साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता, अभिमानी।। हर-हर...

 

मणिमय भवन निवासी, अतिभोगी, रागी।

 

सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी।। हर-हर...

 

छाल कपाल, गरल गल, मुण्डमाल, व्याली।

 

चिताभस्म तन, त्रिनयन, अयन महाकाली।। हर-हर...

 

प्रेत पिशाच सुसेवित, पीत जटाधारी।

 

विवसन विकट रूपधर रुद्र प्रलयकारी।। हर-हर...

 

शुभ्र-सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर, सुखकारी।

 

अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि मनहारी।। हर-हर...

 

निर्गुण, सगुण, निरंजन, जगमय, नित्य प्रभो।

 

कालरूप केवल हर, कालातीत विभो।। हर-हर...

 

सत्, चित्, आनंद, रसमय, करुणामय धाता।

 

प्रेम सुधा निधि, प्रियतम, अखिल विश्व त्राता। हर-हर...

 

हम अतिदीन, दयामय, चरण शरण दीजै।

 

सब विधि निर्मल मति कर अपना कर लीजै। हर-हर...।

No comments:

Post a Comment