Monday, December 11, 2023

आरती श्री प्रेतराज सरकार जी की || Arti Shree Pretraj Sarkar Ji Ki



आरती श्री प्रेतराज सरकार जी की

 

 

जय प्रेतराज कृपालु मेरी, अरज अब सुन लीजिये ।

 

मैं शरण तुम्हारी आ गया हूँ, नाथ दर्शन दीजिये ।

 

मैं करूं विनती आपसे अब, तुम दयामय चित धरो ।

 

चरणों का ले लिया आसरा, प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो ।

 

सिर पर मोरमुकुट करमें धनुष, गलबीच मोतियन माल है ।

 

जो करे दर्शन प्रेम से सब, कटत तन के जाल है ।

 

जब पहन बख्तर ले खड़ग, बांई बगल में ढाल है ।

 

ऐसा भयंकर रूप जिनका, देख डरपत काल है ।

 

अति प्रबल सेना विकट योद्धा, संग में विकराल है ।

 

तब भूत प्रेत पिशाच बांधे, कैद करते हाल है ।

 

तब रूप धरते वीर का, करते तैयारी चलन की ।

 

संग में लड़ाके ज्वान जिनकी, थाह नहीं है बलन की ।

 

तुम सब तरह समर्थ हो, प्रभुसकल सुख के धाम हो ।

 

दुष्टों के मारनहार हो, भक्तों के पूरण काम हो ।

 

मैं हूँ मती का मन्द मेरी, बुद्धि को निर्मल करो ।

 

अज्ञान का अंधेर उर में, ज्ञान का दीपक धरो ।

 

सब मनोरथ सिद्ध करते, जो कोई सेवा करे ।

 

 तन्दुल बूरा घृत मेवा, भेंट ले आगे धरे ।

 

सुयश सुन कर आपका, दुखिया तो आये दूर के ।

 

सब स्त्री अरु पुरुष आकर, पड़े हैं चरण हजूर के ।

 

लीला है अदभुत आपकी, महिमा तो अपरंपार है ।

 

मैं ध्यान जिस दम धरत हूँ, रच देना मंगलाचार है ।

 

सेवक गणेशपुरी महन्त जी, की लाज तुम्हारे हाथ है ।

 

करना खता सब माफ़, उनकी देना हरदम साथ है ।

 

दरबार में आओ अभी, सरकार में हाजिर खड़ा ।

 

इन्साफ मेरा अब करो, चरणों में आकर गिर पड़ा ।

 

अर्जी अब में दे चुका, अब गौर इस पर कीजिये ।

 

तत्काल इस पर हुक्म लिख दो, फैसला कर दीजिये ।

 

महाराज की यह स्तुति, कोई नेम से गाया करे ।

 

सब सिद्ध कारज होय उनके, रोग पीड़ा सब टरे ।

 

"सुखराम" सेवक आपका, उसको नहीं बिसराइये ।

 

जै जै मनाऊं आपकी, बेड़े को पार लगाइये ।

 

 

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